झालावाड़ । जिले में बिना पंजीयन संचालित हो रहे नैदानिक संस्थानों पर अब सख्ती तय है। नैदानिक स्थापन (रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत सभी हॉस्पिटल, क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब का विधिवत स्थायी पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। उल्लंघन की स्थिति में 10 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मोहम्मद साजिद ने बताया कि अधिनियम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इसके लिए प्रत्येक नैदानिक संस्थान को निर्धारित मानकों की पालना करते हुए विधिवत पंजीकरण करवाना होगा। बिना पंजीयन संचालित संस्थानों के विरुद्ध प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।
स्थायी पंजीयन जरूरी-
राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले के सभी लैब संचालकों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्थायी पंजीयन करवाना अनिवार्य है। पंजीयन के बिना किसी भी प्रकार की जांच या चिकित्सा सेवा देना नियम विरुद्ध माना जाएगा।
इन नियमों की पालना भी अनिवार्य
अधिनियम के तहत प्रत्येक नैदानिक संस्थान को—
बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों की पालना
अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC)
उपचार एवं जांच शुल्क की दर सूची का सार्वजनिक प्रदर्शन
मरीजों के अधिकारों का संरक्षण
उपचार संबंधी अभिलेखों का समुचित संधारण
जैसे प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है।
कर्मचारियों पर भी कार्रवाई-
यदि जिले में कोई नैदानिक संस्थान अपंजीकृत पाया जाता है, तो संचालक पर 10 हजार से 5 लाख रुपए तक का जुर्माना अधिरोपित किया जाएगा। साथ ही ऐसे संस्थान में कार्यरत कर्मचारी पर भी 25 हजार रुपए तक का दंड लगाने का प्रावधान है।
सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आमजन से भी अपंजीकृत संस्थानों की जानकारी प्रशासन को देने की अपील की गई है, ताकि गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
