शिव जयंती महोत्सव पर दिया ध्यान योग अपनाने का संदेश

भवानीमंडी। भागदौड़ और तनाव भरे जीवन में हर व्यक्ति सुकून की तलाश में भटक रहा है। मन में चिंता, जीवन में असंतुलन और बढ़ते रोगों के बीच यदि कोई सच्चा सहारा है तो वह है ध्यान योग। जब आत्मा का संबंध परमात्मा से जुड़ता है, तब भीतर की बेचैनी शांत हो जाती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
यह विचार शनिवार को भवानीमंडी स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आदित्य विहार सेंटर पर आयोजित शिव जयंती महोत्सव में संचालिका ब्रह्माकुमारी कुसुम बहिन ने व्यक्त किए।
कुसुम बहिन ने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी साधनों से समृद्ध होने के बावजूद भीतर से खाली और परेशान है। कलयुग के इस समय में मन की शांति केवल आध्यात्मिक साधना से ही संभव है। ध्यान योग के अभ्यास से आत्मा को परमपिता शिव बाबा की दिव्य शक्ति मिलती है, जिससे न केवल मानसिक तनाव दूर होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक सोच और संतुलन भी आता है।
उन्होंने बताया कि ध्यान योग केवल आंखें बंद कर बैठना नहीं, बल्कि स्वयं को पहचानने और अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने की प्रक्रिया है। जब हम अपने भीतर झांकते हैं और परमात्मा से संबंध जोड़ते हैं, तब दुख, अवसाद और नकारात्मकता स्वतः दूर होने लगती है।
शिव जयंती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें याद दिलाता है कि परमात्मा स्वयं इस धरा पर आकर मानवता को सच्चा मार्ग दिखाते हैं। यह दिन आत्मजागृति और आत्मपरिवर्तन का संकल्प लेने का अवसर है।
कार्यक्रम में मुरली के पश्चात शिव बाबा का झंडारोहण एवं महाआरती की गई। पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक सहभागिता की। तत्पश्चात सभी को ब्रह्मभोग वितरित किया गया।
इस अवसर पर अशोक कुमार सोनी, सुरेश जैन करावन, भवँर सिंह कछवाहा, प्रवीण गुप्ता एवं नरपतसिंह नरुका ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए ध्यान योग को जीवन की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने शिव जयंती के पावन अवसर पर आत्मशांति और सकारात्मक जीवन जीने का संकल्प लिया।