मल्हारगढ़/गोपाल मालेचा/  एक ओर जहां सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक बनाने के दावे कर रही है, वहीं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विधानसभा मुख्यालय मल्हारगढ़ में हालात इसके विपरीत हैं। मल्हारगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पिछले कई महीनों से 108 एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को जिला चिकित्सालय मंदसौर रेफर करने में परिजनों के पसीने छूट रहे हैं।
​आपातकालीन स्थिति में जब परिजन व डॉक्टर 108 नंबर पर कॉल करते हैं, तो उन्हें घंटों इंतजार के बाद टका सा जवाब मिलता है कि—"आसपास एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है।" हद तो तब हो जाती है जब कॉल सेंटर से 100 किलोमीटर दूर भानपुरा से एम्बुलेंस भेजने की बात कही जाती है, जबकि मरीज को मात्र 25 किलोमीटर दूर मंदसौर पहुंचाना होता है। ऐसे में मरीज के पास इतना समय नहीं होता कि वह घंटों एम्बुलेंस का इंतजार करे।
​क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो दिन पूर्व स्वयं उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने मानवता दिखाते हुए अपना काफिला रुकवाकर सड़क दुर्घटना में घायल महिला-पुरुष को अस्पताल पहुंचाया था। लेकिन विडंबना देखिए, उन घायलों को भी मल्हारगढ़ से जिला अस्पताल रेफर करने के लिए सरकारी एम्बुलेंस नसीब नहीं हुई।
​शुक्रवार को एक बार फिर एम्बुलेंस के अभाव में अफरा-तफरी का माहौल रहा। मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखकर निजी वाहनों की तलाश करनी पड़ी। मजबूरी में गरीब परिजनों को भारी-भरकम राशि खर्च कर निजी वाहनों से मरीजों को जिला अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
​क्षेत्र में हजारों करोड़ों के विकास कार्यों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मूलभूत स्वास्थ्य सुविधा का न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब उपमुख्यमंत्री के क्षेत्र में यह हाल है, तो प्रदेश के दूरदराज इलाकों की स्थिति क्या होगी?