भवानीमंडी। कोटा स्टोन उद्योग से जुड़े लघु एवं मध्यम उद्यमियों को पर्यावरणीय नियमों में बड़ी राहत मिली है। लघु उद्योग भारती के निरंतर एवं संगठित प्रयासों के परिणामस्वरूप केंद्र व राज्य सरकार के पर्यावरण विभाग ने कोटा स्टोन उद्योग को ऑरेंज कैटेगरी से हटाकर ग्रीन कैटेगरी में शामिल कर दिया है।
ग्रीन कैटेगरी में शामिल होने के बाद अब कोटा स्टोन उद्योग की इकाइयों को पर्यावरण स्वीकृति प्रमाण पत्र केवल एक बार लेना होगा, जो आजीवन मान्य रहेगा। साथ ही प्रमाण पत्र की शुल्क राशि भी न्यूनतम रखी गई है। यह सुविधा पाँच करोड़ रुपये से कम निवेश वाली इकाइयों पर लागू होगी।
नई व्यवस्था के तहत अब चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। वहीं आवेदन प्रक्रिया को भी सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है, जिससे उद्योग संचालकों को किसी एजेंट या मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं रहेगी।
यह उद्योग हितैषी निर्णय 01 फरवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष सीए प्रकाश गुप्ता ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए संगठन के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उद्योग को प्रशासनिक राहत देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं औद्योगिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
