विपक्ष मौन, सत्ता पक्ष बेअसर; क्या एक अदने से कर्मचारी के आगे नतमस्तक है पूरा जिला प्रशासन?
मंदसौर/सचिन जैन | जिला प्रशासन द्वारा शहर को 'मॉडल रोड' की सौगात देने की पहल की चौतरफा सराहना तो हो रही है, लेकिन इसी आदर्श मार्ग पर लगे अवैध होर्डिंग प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा बदनुमा धब्बा साबित हो रहे हैं। विशेषकर महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल के बाहर बिना अनुमति के तने ये होर्डिंग न केवल यातायात और सुंदरता में बाधा हैं, बल्कि जिम्मेदारों की 'मजबूरी' या 'मिलीजुली' पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
आदेश के बाद भी क्यों नहीं चला बुलडोजर?
हैरानी की बात यह है कि इन अवैध होर्डिंग्स को हटाने के स्पष्ट आदेश होने के बावजूद अब तक कार्रवाई सिफ़र रही है। शहर में चर्चा आम है कि क्या नगर पालिका के एक छोटे से कर्मचारी की पहुंच इतनी ऊपर तक है कि उसने जिला प्रशासन, सत्ता पक्ष और विपक्ष, तीनों को बौना साबित कर दिया है?
गरीबों पर डंडा, रसूखदारों को पनाह?
शहर का आम नागरिक अब यह सवाल पूछ रहा है कि जिस 'दमदारी' से प्रशासन ने मॉडल रोड के नाम पर गरीबों की दुकानें और अतिक्रमण हटाए थे, वही साहस इन होर्डिंग माफियाओं के सामने क्यों गायब हो गया? स्कूल जैसी संवेदनशील जगह के बाहर इस तरह के विज्ञापनों का होना नियमों के विरुद्ध है, फिर भी अधिकारियों की चुप्पी जनता का भरोसा तोड़ रही है।
मुख्य सवाल जो जवाब मांग रहे हैं:
- आखिर इन अवैध होर्डिंग माफियाओं का असली संरक्षक कौन है?
- प्रशासन के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
- क्या 'मॉडल रोड' सिर्फ कागजों और चयनात्मक कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा?
अगर जल्द ही इन अवैध होर्डिंग्स को हटाकर सड़क को साफ-सुथरा नहीं किया गया, तो जिला प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' वाली छवि धूमिल होना तय है। जनता देख रही है कि कानून का डंडा सिर्फ कमजोरों के लिए है या रसूखदारों की गर्दन तक भी पहुंचेगा।
