आलोट/ दुर्गाशंकर पहाड़िया/ क्षेत्र के कराडिया गांव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 39 लाख रुपये की लागत से बनाया गया नया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण पूरा होने के करीब 15 महीने बाद भी चालू नहीं हो सका है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह भवन आज भी ताले में बंद पड़ा है, जबकि मरीजों का इलाज जर्जर पुरानी इमारत में मजबूरी में किया जा रहा है।
पुरानी इमारत की हालत बेहद खराब होने के कारण ही नया भवन बनाए जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन लोकार्पण के नाम पर फाइलें अटकी रहीं और ग्रामीणों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया। इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता करण सिंह राठौर ने दो महीने पहले सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद भी न तो भवन खुला और न ही व्यवस्था सुधरी।
करण सिंह राठौर का आरोप है कि दूसरी बार की गई शिकायत पर सीएम हेल्पलाइन से जवाब दिया गया कि नई बिल्डिंग में स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि भवन पर आज भी ताले लटके हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही और झूठी रिपोर्टिंग करार देते हुए कहा कि नई बिल्डिंग चालू होने से आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को राहत मिल सकती है। यहां डिलीवरी जैसी जरूरी सुविधा भी शुरू हो सकती थी, जिससे ग्रामीण महिलाओं को दूर-दराज भटकना नहीं पड़ता, लेकिन जिम्मेदारों को जनता की सेहत से कोई सरोकार नहीं है।


वर्तमान में स्वास्थ्य केंद्र पुरानी इमारत में संचालित हो रहा है, जहां केवल एक डॉक्टर और एक एएनएम के भरोसे व्यवस्था चल रही है। सीमित संसाधनों के चलते मरीजों को कई बार वापस लौटना पड़ता है।
इस संबंध में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. देवेंद्र मौर्य का कहना है कि नई बिल्डिंग का लोकार्पण क्षेत्रीय विधायक और सांसद द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। समय तय होते ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि सवाल यह है कि जब भवन तैयार है तो केवल लोकार्पण के इंतजार में जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित रखना किसकी जिम्मेदारी है।
कराडिया गांव का यह स्वास्थ्य केंद्र अब सुविधा का केंद्र बनने के बजाय सरकारी उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है, जहां करोड़ों के दावे और जमीनी हकीकत के बीच की खाई साफ दिखाई दे रही है।