इससे बचाव एवं उपचार

भवानीमंडी ( जगदीश पोरवाल ) सर्दियों के मौसम में जिले में त्वचा रोगों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। चर्म रोगों के मरीजों की संख्या सर्दियों में सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार कोहरा, ठंडी व सूखी हवा, गाजर घास का संपर्क और त्वचा की गलत देखभाल इसके प्रमुख कारण हैं।

जिला चिकित्सालय के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम पाटीदार  ने बताया कि सर्दियों में हवा में नमी बहुत कम हो जाती है। यह सूखी हवा धीरे-धीरे त्वचा से नमी खींच लेती है, जिससे त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत कमजोर पड़ जाती है और खुजली, जलन, रैश तथा संक्रमण आसानी से हो जाते हैं।

कोहरे में धूप क्यों बन रही है त्वचा के लिए खतरा :-

डॉ. पाटीदार के अनुसार सर्दियों में लोग कोहरे के बीच निकलने वाली हल्की धूप में देर तक बैठते हैं और यह मान लेते हैं कि जब गर्मी महसूस नहीं हो रही तो धूप नुकसानदेह नहीं होगी। जबकि वैज्ञानिक तथ्य यह है कि सूरज की पराबैंगनी किरणें (यूवी किरणें) सर्दियों में भी उतनी ही सक्रिय रहती हैं। इसी कारण एक्टिनिक डर्मेटाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं, जिसमें चेहरे, गर्दन और हाथों पर लालिमा, जलन, सूजन और काले धब्बे पड़ जाते हैं। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और इसका इलाज लंबे समय तक चल सकता है।


सर्दियों में बढ़ने वाली प्रमुख त्वचा समस्याएँ :-

सर्दियों के दौरान सबसे अधिक जिन समस्याओं के मरीज सामने आ रहे हैं, उनमें रूखी त्वचा, लगातार खुजली, होंठों और एड़ियों का फटना, ड्राई एक्ज़िमा, सोरायसिस का बढ़ जाना, अटोपिक डर्मेटाइटिस, इक्कथियोसिस,बच्चों और बुज़ुर्गों में एलर्जी तथा हाथ-पैर की उंगलियों में तीव्र खुजली प्रमुख हैं। जिन लोगों को पहले से एलर्जी, दमा या सोरायसिस की समस्या होती है, उनमें सर्दियों में लक्षण अधिक गंभीर हो जाते हैं।

आम तौर पर की जाने वाली गलतियाँ

बहुत गर्म पानी से नहाना, नहाने के काफी देर बाद क्रीम लगाना, सर्दियों में सनस्क्रीन का उपयोग बंद कर देना, ऊनी कपड़े सीधे त्वचा पर पहनना, हीटर या ब्लोअर के सामने लंबे समय तक बैठना तथा खुजली होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉइड क्रीम लगाना—ये सभी आदतें त्वचा को और अधिक नुकसान पहुँचाती हैं

सर्दियों में त्वचा की सही देखभाल के विशेषज्ञ सुझाव:-

डॉ. शुभम् पाटीदार ने बताया कि सर्दियों में त्वचा की देखभाल कठिन नहीं है, बस तरीका सही होना चाहिए।
हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें; बहुत गर्म पानी त्वचा के प्राकृतिक तेल को नष्ट करता है।
नहाने के बाद तौलिए से रगड़ने के बजाय हल्के हाथ से शरीर सुखाएँ।
नहाने के तीन मिनट के भीतर मॉइस्चराइज़र लगाएँ ताकि त्वचा की नमी सुरक्षित रह सके।
नारियल तेल, तिल का तेल, सनफ्लावर ऑयल या जैतून का तेल सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हैं।
चेहरे और शरीर के लिए अलग-अलग मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें।
ऊनी कपड़ों के नीचे सूती कपड़े पहनें ताकि खुजली और एलर्जी से बचाव हो।
सर्दियों में भी धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन का प्रयोग करें।
प्यास कम लगे तब भी पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, क्योंकि अंदर की नमी त्वचा को स्वस्थ रखती है।

कब डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है:-

यदि खुजली, जलन या रैश एक सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, रात में अधिक बढ़ें या घरेलू उपायों से ठीक न हों, तो इसे सामान्य सर्दी की समस्या समझकर नजरअंदाज न करें और त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
सही जानकारी, समय पर सावधानी और जन-जागरूकता से सर्दियों में होने वाली अधिकांश त्वचा समस्याओं से बचा जा सकता है। गाजरघास मुक्त स्वस्थ झालावाड़ अभियान के अंतर्गत जिले में आयोजित किए जा रहे जागरूकता सत्र एवं परामर्श शिविर आमजन को त्वचा रोगों से बचाव और सही उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।