आलोट/दुर्गाशंकर पहाड़िया । तीर्थ स्थलों पर जाने का उद्देश्य सेल्फी या मनोरंजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, दर्शन और धर्मभाव होना चाहिए। तभी सनातन परंपराएं सुरक्षित रहेंगी और हमारी संस्कृति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। ये विचार आलोट नगर की आस्था का केंद्र श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के दौरान कथावाचक पंडित मनमोहन कश्यप ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि आज तीर्थों का स्वरूप बदलता जा रहा है, जहां लोग धार्मिक भाव के बजाय दिखावे को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो चिंताजनक है। सनातन संस्कृति को जीवित रखने के लिए तीर्थ यात्रा को साधना और आत्मशुद्धि का माध्यम बनाना आवश्यक है।
मंदिर जीर्णोद्धार एवं व्यवस्था समिति की ओर से आयोजित इस कथा के पंचम दिवस सोमवार को भगवान गणेश के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान गणेश जी एवं ऋद्धि-सिद्धि का विवाह उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। साथ ही देवताओं की रक्षा के लिए तारकासुर वध का प्रसंग सुनाते हुए भगवान कार्तिकेय की वीरता का विस्तृत वर्णन किया गया।
कथा के दौरान पंडित कश्यप का स्वागत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश पाठक, महिला जिला उपाध्यक्ष संजू भाटी, यूथ कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष अशोक पांचाल, योगेश निगम, करवाखेड़ी आश्रम के संत योगी प्रकाशनाथ जी महाराज सहित विनोद माली, नागेंद्र सिंह डोडिया, जन्मजय पाटीदार, सुमित गुप्ता, राज्य सफाई कर्मचारी मोर्चा के कमलेश उमरवाल, ताराचंद डूलगज, सुनील उमरवाल, किशोर चौहान, अमन डूलगज ने सम्मान कर किया। वहीं राधाकृष्ण भक्त मंडल के जितेंद्र कृष्ण शास्त्री, अनिल रावल सहित सभी सदस्यों द्वारा भी स्वागत किया गया।
सोमवार को पंडाल में गणेश जी की भव्य बारात निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर 56 भोग अर्पित किए गए तथा महाप्रसादी का वितरण किया गया।
इस दौरान श्याम प्रेमी भगत ताराचंद डूलगज ने अपने पिता स्वर्गीय रामगोपाल जी डूलगज की स्मृति में 11 हजार रुपए तथा शिव प्रेमी कुंदन सोनी ने भी मंदिर शिखर निर्माण हेतु 11 हजार रुपए की राशि भेंट की। कार्यक्रम में मंदिर समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में शिवभक्त उपस्थित रहे।