आलोट/दुर्गाशंकर पहाड़िया । जब जिले में यूरिया खाद को लेकर आपूर्ति प्रभावित बताई जा रही है और किसान समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, उसी समय आलोट में एक निजी गोदाम में राजस्थान पासिंग बड़े ट्राला ट्रक से भारी मात्रा में यूरिया खाद उतारे जाने का मामला सामने आया है। इस गतिविधि की सूचना पूर्व में दिए जाने के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन निरीक्षण के बावजूद न तो माल रोका गया और न ही कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई।


जानकारी के अनुसार मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने ट्राला ट्रक और खाद के फोटो-वीडियो बनाए, भाड़ा बिल्टी की तस्वीरें लीं और वापस लौट गए। इसके बाद रात के समय उसी गोदाम में यूरिया खाद का उतार लगातार जारी रहा, जिसका वीडियो भी सामने आया है। निरीक्षण के बाद भी उतार जारी रहना इस बात पर सवाल खड़े करता है कि क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई।
भाड़ा बिल्टी के मुताबिक राजस्थान पासिंग बड़े ट्राला ट्रक से 670 बोरी, कुल 30.150 मीट्रिक टन यूरिया खाद आलोट लाई गई। दस्तावेजों में उर्वरक विक्रय लाइसेंस की वैधता, निर्धारित भंडारण सीमा तथा अंतरराज्यीय आवंटन अथवा अनुमति का स्पष्ट उल्लेख सामने नहीं आता। निजी गोदाम में इतनी बड़ी मात्रा में सब्सिडी युक्त उर्वरक उतारने की अनुमति किस आधार पर दी गई, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
यूरिया एक नियंत्रित उर्वरक है, जिसकी आपूर्ति, भंडारण और वितरण सरकार द्वारा तय व्यवस्था के तहत होता है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब जिले में खाद की कमी की स्थिति बनी हुई है, तब इतनी बड़ी खेप आखिर किस आवंटन से और किस चैनल के माध्यम से निजी गोदाम तक पहुंची। यदि यह खेप वैध और नियमानुसार थी, तो निरीक्षण के बाद भी इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक न होना कई आशंकाओं को जन्म देता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि संकट की स्थिति में किसी भी प्रकार की अस्पष्ट आपूर्ति व्यवस्था कालाबाजारी और असमान वितरण की संभावना को बढ़ाती है। वहीं स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सूचना के बाद भी प्रभावी कार्रवाई न होना निगरानी तंत्र की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब आवश्यकता है कि संबंधित ट्राला ट्रक, निजी गोदाम, भाड़ा बिल्टी, उर्वरक लाइसेंस, अंतरराज्यीय अनुमति तथा मौके पर की गई कार्रवाई की समग्र और निष्पक्ष समीक्षा की जाए। साथ ही जहां से यूरिया भेजे जाने का उल्लेख है, वहां के संबंधित प्रशासनिक एवं गोदाम स्टाफ का भी मिलान कर जांच की जाए कि वास्तव में यूरिया वहीं से रवाना हुआ था या नहीं, अथवा कहीं भाड़ा बिल्टी फर्जी तो नहीं है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खाद संकट के बीच निजी भंडारण तक पहुंची यह खेप नियमों के दायरे में थी या नहीं।