मंदसौर। केंद्र सरकार द्वारा अफीम नीति घोषित नहीं किए जाने से अफीम उत्पादक किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नीति जल्द घोषित करने और किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर किसान नेता श्यामलाल जोकचंद के नेतृत्व में गुरुवार, 22 अक्टूबर को मंदसौर में पैदल मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद जिला अफीम अधिकारी कार्यालय का घेराव कर मांगों के निराकरण की आवाज उठाई जाएगी।
किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने बताया कि पैदल मार्च सुबह 11 बजे सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे से शुरू होगा। उन्होंने क्षेत्र के अफीम उत्पादक किसानों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
अफीम नीति और पट्टा बहाली की मांग
किसानों की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार द्वारा अफीम नीति तत्काल घोषित करना, सभी पात्र किसानों को 10 आरी के चिरा वाले पट्टे जारी करना तथा वर्ष 1997-98 में काटे गए पट्टों को बहाल करना शामिल है। इसके अलावा सीपीएस पद्धति के स्थान पर पारंपरिक तरीके से अफीम की खेती के पट्टे देने और नए पात्र किसानों को लाइसेंस जारी करने की मांग भी उठाई गई है।
अफीम और डोडाचूरा का भाव बढ़ाने की मांग
किसान नेता ने अफीम का भाव एक लाख रुपये प्रति किलो तथा डोडाचूरा की खरीद दर एक लाख रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग की है। साथ ही डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.2 प्रतिशत से कम होने पर उसे एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर करने और संबंधित कानूनी प्रावधानों में संशोधन की मांग भी रखी है।
फसल बीमा में शामिल करने की मांग
किसानों की एक अन्य प्रमुख मांग अफीम की फसल को बीमा योजना में शामिल करने की है। किसान नेता का कहना है कि प्राकृतिक आपदा या प्रतिकूल मौसम के कारण फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक राहत मिलनी चाहिए।
श्यामलाल जोकचंद ने केंद्र सरकार से किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना है कि समय पर अफीम नीति घोषित होने से किसान आगामी फसल की तैयारी कर सकेंगे और पट्टा व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होगी।
22 अक्टूबर को प्रस्तावित पैदल मार्च और जिला अफीम अधिकारी कार्यालय के घेराव के माध्यम से किसान अपनी मांगों को प्रशासन और केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
