आलोट / उन्हेंल/दुर्गाशंकर पहाड़िया इंसान तृष्णा के वशीभूत होकर दुखी रहता है, जबकि संपूर्ण प्रकृति हमें निरंतर देना सिखाती है। बादल वर्षा देते हैं, फूल सुवास, सूर्य प्रकाश, चंद्रमा शीतलता, वृक्ष जीवन और नदियां जल देती हैं। प्रकृति के पास ‘ना’ शब्द नहीं है, लेकिन मनुष्य समय आने पर ‘हां’ कहने के बजाय ‘ना’ कह देता है। यदि नकारात्मक विचार और ‘ना’ कहना छोड़ दिया जाए तो प्रकृति स्वयं सफलता का मार्ग प्रशस्त कर देती है। मनुष्य जीवन भर लोभ, मोह और लालच में केवल लेने की प्रवृत्ति रखता है और इन्हीं तुच्छ इच्छाओं के कारण दुखी रहता है।

यह विचार श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ में श्री पार्श्वनाथ प्रभु के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री विश्वरत्नसागरसूरीजी म.सा. ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्य श्री ने कहा कि प्रभु के जन्म के समय नरक के जीव भी शांति का अनुभव करते हैं। तीर्थंकर की जयंती नहीं, बल्कि कल्याणक मनाया जाता है, क्योंकि प्रभु समग्र सृष्टि के कल्याण की भावना के साथ अंतिम जन्म लेते हैं और स्व-पर कल्याण करते हुए मोक्ष पथ के अनुगामी बनते हैं। धर्मसभा को श्री तीर्थरत्नसागरजी म.सा. ने भी संबोधित किया।
ज्ञात हो कि महोत्सव में पांच सौ से अधिक अठ्ठम तप के तपस्वी यहां ठहरकर तीन दिवसीय उपवास की तपस्या कर रहे हैं। प्रवचन के दौरान हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने भक्ति संगीत की धुनों पर पार्श्वनाथ प्रभु के जयकारे लगाते हुए हर्षोल्लास के साथ जन्म महोत्सव मनाया। संगीतकार त्रिलोक मोदी द्वारा प्रभु के जन्म कल्याणक पर आधारित स्वरलहरियों का मंचन किया गया। लाभार्थी परिवारों के सदस्यों ने भगवान के माता-पिता एवं इंद्र-इंद्राणी का स्वरूप धारण कर भगवान की माता को चौदह स्वप्नों की नृत्य-नाटिकाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर महोत्सव आयोजक वीरेंद्र शाह (मुंबई), रतिलाल विशाल मेहता (घोटी), गौतम जैन (आगर), हंसराज जैन (चौमहला), मोहन जैन (अकलेरा), अनिल देसरला (आलोट), पारस चौरड़िया (झारड़ा) आदि का तीर्थ पेढ़ी की ओर से सचिव धर्मचंद जैन, कोषाध्यक्ष प्रसन्न लोढ़ा, ट्रस्टी बाबूलाल आंचलिया, मोहनलाल कांसवा एवं गौतमचंद ओसवाल तथा मालवा महासंघ के अनिल देसरला ने बहुमान किया। इस दौरान डग विधायक कालूराम वर्मा एवं मुंबई–नागेश्वर दशम मंडल के सदस्यों का भी सम्मान किया गया। प्रवचन में उपवास तपस्या की अनुमोदना स्वरूप प्रभावना राशि एकत्रित की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने मुक्त हस्त अनुदान देकर लाभ लिया।
महोत्सव के तहत प्रातः प्रार्थना एवं भक्तामर पाठ के बाद भगवान के पक्षाल का आयोजन हुआ। तत्पश्चात विशाल पांडाल में जन्म कल्याणक का धूमधाम से आयोजन किया गया। आयोजक परिवारों की ओर से समग्र समाज के लिए भोजन प्रसादी एवं साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन किया गया, जिसमें तीर्थ यात्रियों सहित ग्रामीणजनों ने गौतम प्रसादी का लाभ लिया।
दोपहर में साधर्मिक वात्सल्य के पश्चात भव्य रथयात्रा निकाली गई। रथ, इंद्रध्वजा, हाथी-घोड़े, बग्घियां एवं बैंड-बाजों के साथ निकली रथयात्रा में नवयुवकों की टोलियां जयकारों के साथ आगे बढ़ती रहीं। सायंकाल मुख्य मंदिरजी में 1008 दीपकों की रोशनी, रंगोली एवं विभिन्न प्रकार की गहुलियों से भव्य सजावट की गई। व्यवस्थाओं में उन्हैल नागेश्वर सहित आलोट, चौमहला, सुवासरा एवं बड़ौद से आए नवयुवक मंडल, नवरत्न परिवार, बहु मंडल, महिला मंडल एवं बालिका मंडलों ने सराहनीय सेवाएं प्रदान कीं।
कल होगा दीक्षा कल्याण
महोत्सव के अंतर्गत कल भगवान के दीक्षा कल्याणक का आयोजन होगा। इस अवसर पर आचार्य श्री द्वारा ओघा है अनमोल विषय पर प्रवचन दिए जाएंगे।
