हाईकोर्ट का सवाल- क्या युवक 10 साल फैसले का इंतजार करेगा?

मंदसौर/ मल्हारगढ़ में 18 वर्षीय छात्र को बस से उठाकर NDPS एक्ट के तहत अफीम तस्करी के केस में फंसाने के आरोपों पर मंगलवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई ।

इस दौरान मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा स्वयं अदालत में पेश हुए और स्वीकार किया कि युवक को पकड़ने वाली पुलिस टीम मल्हारगढ़ थाने की ही थी। एसपी ने कोर्ट को बताया कि मामले में निर्धारित जांच प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया इसके चलते 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। लंबी बहस के बाद हाईकोर्ट ने मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है ।

परिजनों के अनुसार सोहन 12वीं में फर्स्ट डिवीजन से पास होनहार छात्र है और पीएससी की तैयारी करना चाहता था वह 29 अगस्त को रिश्तेदारों से मिलने मंदसौर आया था,तभी उसे झूठे केस में फंसा दिया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि स्थिति ट्रायल कोर्ट में स्पष्ट हो जाएगी। इस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा “तो क्या आरोपी युवक 10 साल तक फैसले का इंतजार करता रहेगा ?

कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब मल्हारगढ़ थाने में 55 पुलिसकर्मी पदस्थ हैं,तब भी कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ ।

बस से जबरन पकड़ा गया था छात्र

29 अगस्त 2025 को 18 वर्षीय सोहन मंदसौर से प्रतापगढ़ जा रहा था इसी दौरान बस में 3-4 लोग चढ़े और उसे जबरन नीचे उतारकर ले गए। युवक को मल्हारगढ़ थाने ले जाकर उस पर 2 किलो 714 ग्राम अफीम रखने का मामला दर्ज किया गया और अगले दिन कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया ।

FIR और सीसीटीवी में दो बातें आई सामने

मल्हारगढ़ पुलिस ने एफआईआर में दर्शाया था कि पुलिस ने मुखबिर की निशानदेही पर मल्हारगढ़ स्थित बांडा खाल चौराहा के नजदीक श्मशान के सामने से सोहनलाल को हिरासत में लिया था उसके पास मौजूद पिट्ठू बैग की तलाशी ली तो उसमें 2 किलो 714 ग्राम अफीम बरामद हुई,जिसकी कीमत 5 लाख 42 रुपए आंकी गई

हालांकि सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर से दिख रहा है कि पुलिस आरोपी को बस से उतार कर गिरफ्त में लेती है

सीसीटीवी फुटेज से पलटा पूरा मामला

परिजनों ने ट्रैवल्स कंपनी से बस का सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किया,फुटेज में साफ दिखा कि सुबह 11:39 बजे कुछ पुलिसकर्मी बस में चढ़े और सफेद शर्ट पहने सोहन को जबर्दस्ती उतारा गया उसी दिन शाम 5:17 बजे उसके खिलाफ अफीम का केस दर्ज हुआ। यह वीडियो हाईकोर्ट में पेश किया गया, जिससे पुलिस का दावा कमजोर पड़ गया

5 दिसंबर की सुनवाई में पुलिस ने दावा किया था कि बस से युवक को उठाने वाली टीम मल्हारगढ़ की नहीं थी लेकिन फोटो-वीडियो सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने इसे गलत पाया और एसपी को स्वयं उपस्थित होने का आदेश दिया कोर्ट ने माना कि इस केस में गिरफ्तारी और जांच की प्रक्रिया संदिग्ध रही