कमलाशंकर विश्वकर्मा ने खेत को बनाया बायोडायवर्सिटी पार्क और कृषि नवाचार का केंद्र

नीमच : कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन एवं कृषि विभाग के सहयोग से विकासखंड मनासा के ग्राम भाटखेड़ी निवासी किसान श्री कमलाशंकर विश्वकर्मा ने खेती को नवाचार, जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और अतिरिक्त आय से जोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अपने खेत को ‘विश्वकर्मा बैम्बू फार्म एंड बायोडायवर्सिटी पार्क’ के रूप में विकसित करने की पहल की है।

      श्री विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने बांस की खेती को अपनाकर इसे आय के साथ पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा है। बांस से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार कर उनका मूल्यवर्धन एवं विक्रय किया जाता है। इसी नवाचार के कारण क्षेत्र में उन्हें ‘बैम्बू मैन’ के नाम से पहचान मिली है।

      उनके खेत में बांस के साथ मूंग, उड़द, मूंगफली, मक्का और चिया जैसी फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा ढैंचा बीज उत्पादन और प्राकृतिक एवं जैविक खेती से जुड़े प्रयोग भी किए जा रहे हैं। फसल विविधता और जैविक पद्धतियों के माध्यम से वे मिट्टी के स्वास्थ्य तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दे रहे हैं।

      श्री विश्वकर्मा परंपरागत कृषि विकास योजना से भी जुड़े हैं। योजना के तहत उन्हें ₹5,000 प्रतिवर्ष, तीन वर्षों तक सहायता राशि मिल रही है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन से वे जैविक खेती को आगे बढ़ाने के साथ अपने अनुभव किसानों और विद्यार्थियों के साथ साझा कर रहे हैं।

      बांस की खेती, जैव विविधता और कृषि प्रयोगों से विकसित उनका खेत अब कृषि, पर्यावरण, शिक्षा और कृषि पर्यटन का केंद्र बन रहा है। यहां आने वाले लोग विभिन्न कृषि नवाचारों को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकते हैं।

      श्री विश्वकर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के हित में संचालित योजनाओं से उन्हें खेती में नए प्रयोग करने का अवसर मिला है। उन्होंने कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन और कृषि विभाग के सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया।

      उनकी पहल यह संदेश देती है कि नवाचार और प्रकृति के साथ सामंजस्य से खेती को केवल उत्पादन नहीं, बल्कि आय, पर्यावरण संरक्षण और कृषि पर्यटन का बहुआयामी माध्यम बनाया जा सकता है।