साइबर ठगों का नया मॉड्यूल, डिजिटल सुरक्षा पर बड़े सवाल
आलोट/दुर्गाशंकर पहाड़िया । नगर में साइबर ठगों ने ऑनलाइन वित्तीय अपराध का ऐसा नया तरीका अपनाया है जिसने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पुजारी के बैंक खाते से बिना किसी मैसेज, ओटीपी या कॉल के 99,500 रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित को इस बारे में तब पता चला जब उन्होंने बैंक में पासबुक अपडेट करवाई।

जानकारी के अनुसार 18 नवंबर को दो अलग-अलग ट्रांजैक्शनों में पहले 98,000 और फिर 1,500 रुपये गुवाहाटी स्थित एक बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। आश्चर्यजनक रूप से न पीड़ित को लेनदेन का कोई संदेश मिला और न ही सत्यापन हेतु ओटीपी भेजा गया। लेनदेन की सूचना सीधे पासबुक अपडेट के दौरान सामने आई।
घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू करते हुए बैंक से ट्रांजैक्शन डिटेल्स मांगी हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ठगों ने डिजिटल माध्यम से खाते की संवेदनशील जानकारी हैक कर सिस्टम के माध्यम से राशि स्थानांतरित की।
जनहित में बड़े सवाल
जब नियमों के अनुसार हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में ओटीपी अनिवार्य है, तो फिर यह लेनदेन कैसे हुआ?
क्या ग्राहक की जानकारी किसी ऐप, वॉलेट या अनधिकृत बैंकिंग चैनल के माध्यम से लीक हुई?
क्या ऐसे मामलों में बैंक ग्राहक को जवाब देने और क्षतिपूर्ति करने के लिए बाध्य होंगे?
पिछले कुछ महीनों में आलोट और आसपास के क्षेत्र में साइबर ठगी के कई मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें अधिकांश मामलों में न तो पैसा वापस मिल पाया और न ही आरोपी पकड़ में आए। यह घटना डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा की वास्तविक स्थिति को सामने लाती है।
आलोट थाना प्रभारी मुनेंद्र गौतम की अपील
थाना प्रभारी मुनेंद्र गौतम ने कहा कि आम लोग किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल, ईमेल या मोबाइल ऐप पर भरोसा न करें और बैंकिंग से संबंधित जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि समय पर रिपोर्ट करने से धनराशि रोकने और आरोपी तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।
पुलिस ने कहा है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी टीम जांच में जुटी है और साइबर ठगों का सुराग जल्द मिलने की उम्मीद है।
