पूज्य संतों के सानिध्य में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से सौंपा गया प्रार्थना-पत्र
मंदसौर। गौमाता को "राष्ट्रमाता" का सम्मान दिलाने, गौहत्या पर प्रभावी प्रतिबंध, गौ संरक्षण, गौ संवर्धन एवं भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित "गौ सम्मान आह्वान अभियान" के द्वितीय चरण के अंतर्गत आज मंदसौर में ऐतिहासिक जनजागरण का विराट दृश्य देखने को मिला। जिले की समस्त तहसीलों, गौशालाओं, धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, संत-महात्मा, मातृशक्ति, युवा एवं हजारों गौभक्त एकत्रित होकर गौमाता के सम्मान में विशाल गौ सम्मान कीर्तन यात्रा में सम्मिलित हुए।
यात्रा का शुभारंभ विश्वप्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर में पूजन-अर्चन एवं गौमाता की आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात संतों के सानिध्य में समस्त गौभक्तों ने "श्री राम जय राम जय जय राम" विजय महामंत्र का अखंड जाप करते हुए गौमाता की रक्षा, संवर्धन एवं राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने का संकल्प लिया। भजन-कीर्तन, धर्मध्वजाओं एवं जयघोषों के साथ यात्रा वीर सावरकर पुलिया, मंडीगेट, सदर बाजार, घंटाघर, शुक्ला चौक, नयापुरा रोड, पाताल लोक प्रेस, कालाखेत, गौतम नगर, पुराना बस स्टैंड, बड़े बालाजी मंदिर, भारत माता चौराहा एवं कालिदास मार्ग से होती हुई शहर कोतवाली पहुँची।
यात्रा में नगर के अनेक धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा संगठनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर गौ संरक्षण के इस जनआंदोलन को अपना समर्थन दिया।
शहर कोतवाली परिसर में पूज्य संतों ने सामूहिक रूप से प्रार्थना-पत्र का वाचन किया। तत्पश्चात भारत की महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, मध्यप्रदेश के माननीय राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम तैयार किया गया हजारों नागरिकों के हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र जिला प्रशासन की ओर से उपस्थित तहसीलदार मंदसौर को सौंपा गया।
संतों का दिव्य सानिध्य रहा प्राप्त
इस ऐतिहासिक यात्रा में परम पूज्य महंत रामकिशोर दास जी महाराज (तीन छतरी बालाजी धाम, मंदसौर), महंत श्री मणि महेश चैतन्य जी महाराज (चैतन्य आश्रम, मंदसौर), पूज्य गुरुदेव श्री अंबाजी धाम निपानिया, पूज्य गुरुदेव दशरथ भाई जी शर्मा, पूज्य गुरुदेव महंत महाकाल नाथ योगी जी, पूज्य गुरुदेव मुरलीधर जी शर्मा (धारियाखेड़ी), पूज्य गुरुदेव पंडित कपिल जी शास्त्री (गुरुकुल, मंदसौर), पूज्य गुरुदेव सुनील जी शर्मा (नाहरगढ़), पूज्य गुरुदेव पुलकित जी नागर (अलावदाखेड़ी), पूज्य गुरुदेव विष्णु जी शर्मा (रठाना), पूज्य गुरुदेव पंडित दिलीप व्यास जी, पंडित राधे कृष्ण जी शर्मा (शामगढ़), पंडित अक्षय जी पांडे (बसई), आचार्य पंडित बंशीलाल जी शर्मा, पंडित शिवनारायण जी शर्मा, पंडित किशोर शास्त्री जी एवं पंडित सतीश भट्ट जी सहित अनेक संत-महात्माओं का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ।
संतों के प्रेरणादायी उद्बोधन
परम पूज्य महंत रामकिशोर दास जी महाराज ने कहा कि "गौमाता भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। गौ रक्षा केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म है। प्रत्येक सनातनी को गौ संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।"
महंत श्री मणि महेश चैतन्य जी महाराज ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि "समाज की शक्ति उसकी एकता में है। जब संत, समाज और युवा एक साथ खड़े होते हैं तो परिवर्तन निश्चित होता है। गौमाता के सम्मान का यह अभियान पूरे देश में जनजागरण का माध्यम बनेगा।"
पूज्य गुरुदेव श्री अंबाजी धाम निपानिया ने कहा कि "गौसेवा मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। गौमाता का संरक्षण हमारी संस्कृति, कृषि, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है।"
पूज्य गुरुदेव दशरथ भाई जी शर्मा ने कहा कि "आज की यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की चेतना का जागरण है। प्रत्येक परिवार को गौमाता के सम्मान और संरक्षण के इस अभियान में अपना योगदान देना चाहिए।"
पूज्य गुरुदेव महंत महाकाल नाथ योगी जी ने कहा कि "गौमाता भारतीय संस्कृति, धर्म और राष्ट्रजीवन की आत्मा हैं। गौ रक्षा ही राष्ट्र रक्षा है।"
पूज्य गुरुदेव मुरलीधर जी शर्मा (धारियाखेड़ी) ने कहा कि "गौमाता का संरक्षण केवल परंपरा नहीं, बल्कि हमारी भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है।"
पूज्य गुरुदेव पंडित कपिल जी शास्त्री (गुरुकुल, मंदसौर) ने कहा कि "वेदों और शास्त्रों में गौमाता का सर्वोच्च स्थान बताया गया है। समाज को गौसेवा को जीवन का संस्कार बनाना चाहिए।"
पूज्य गुरुदेव सुनील जी शर्मा (नाहरगढ़) ने कहा कि "गौमाता के प्रति श्रद्धा, सेवा और समर्पण ही सच्चे सनातनी जीवन की पहचान है।"
पूज्य गुरुदेव पुलकित जी नागर (अलावदाखेड़ी) ने कहा कि "गौ संरक्षण का यह अभियान सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का प्रेरक अभियान है।"
पूज्य गुरुदेव विष्णु जी शर्मा (रठाना) ने कहा कि "गौमाता का सम्मान भारत की आत्मा का सम्मान है। प्रत्येक नागरिक को इस पुनीत कार्य में अपना योगदान देना चाहिए।"
पूज्य गुरुदेव पंडित दिलीप व्यास जी ने कहा कि "गौसेवा भारतीय संस्कृति का शाश्वत संदेश है। समाज को एकजुट होकर गौ संरक्षण के लिए आगे आना होगा।"
पंडित राधे कृष्ण जी शर्मा (शामगढ़) ने कहा कि "गौमाता के आशीर्वाद से समाज में सुख, समृद्धि और धर्म की स्थापना होती है।"
पंडित अक्षय जी पांडे (बसई) ने कहा कि "गौ संरक्षण का संकल्प प्रत्येक युवा तक पहुँचना चाहिए, तभी अभियान सफल होगा।"
आचार्य पंडित बंशीलाल जी शर्मा ने कहा कि "सनातन संस्कृति का गौरव गौमाता से जुड़ा है। गौसेवा हमारा परम धर्म है।"
पंडित शिवनारायण जी शर्मा (मंदसौर) ने कहा कि "गौमाता के सम्मान के लिए समाज का संगठित प्रयास समय की आवश्यकता है।"
पंडित किशोर शास्त्री जी ने कहा कि "गौमाता के प्रति श्रद्धा और सेवा ही भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है।"
पंडित सतीश भट्ट जी ने कहा कि "गौमाता की रक्षा का संकल्प केवल आज का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है।"
इन सभी पूज्य संतों ने उपस्थित हजारों गौभक्तों के साथ "श्री राम जय राम जय जय राम" विजय महामंत्र का सामूहिक जाप कराया तथा गौमाता की रक्षा, संवर्धन एवं राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने के लिए आजीवन समर्पित रहने का संकल्प दिलाया। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि गौ संरक्षण के इस जनजागरण को घर-घर तक पहुँचाकर इसे एक राष्ट्रव्यापी अभियान बनाया जाए।
गौ सम्मान आह्वान अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता विनय दुबेला ने बताया कि यह अभियान किसी व्यक्ति या संगठन विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन समाज की आस्था का अभियान है। जिलेभर की गौशालाओं, गौसेवा समितियों एवं सामाजिक संगठनों ने जिस प्रकार एकजुट होकर सहभागिता की है, वह गौ संरक्षण के प्रति समाज की जागरूकता और समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यह जनजागरण निरंतर जारी रहेगा।
अंत में उपस्थित सभी संतों, गौसेवकों एवं समाजजनों ने गौमाता के सम्मान, संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को इस अभियान से जोड़ने का सामूहिक संकल्प लिया।
बैठक में पूज्य संतों, धर्माचार्यों, गौसेवकों, विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारियों तथा समाजजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें प्रमुख रूप से शंकर सिंह चौहान,डॉ. प्रवीण सिंह मंडलोई, राजाराम तंवर, वर्दीचंद कुमावत, डॉ. रविंद्र पांडे, पंडित ललित भारद्वाज, कन्हैयालाल सोनगरा, अजीजुल्ला खान, अशोक गुप्ता, यशपाल सिंह पंवार, राकेश भाटी, घनश्याम सिंह तोमर, राघव सिंह तोमर, देवेंद्र राव, बंसीलाल टाक, कमलेश नागदा, भावनदास मगनानी, हरिराव जाधव, मदनलाल मालवीय, राजेश चौधरी, महेश कुमार वैष्णव, रामनारायण माली, भोला भारती सोनी, सुरेश कुमार शर्मा, मुकेश पटेल, रमेशचंद्र गुप्ता, वीरेंद्र पाटीदार, विशाल सोनी, बाबूलाल लोहार, राजेंद्र सिंह पंवार, रामगोपाल कुमावत, मांगीलाल विश्वकर्मा, हेमंत सुरा, रूपनारायण मोदी, अशोक भावसार, ओम बड़ोदिया, प्रदीप सोनी, रामलाल सोनी, रवि सोनी, भागीरथ पाटीदार, जितेंद्र सोनी, शंभूसेन राठौर, प्रकाश कल्याणी, राजेश चौहान, महेश सोलंकी,महेन्द्र सिंह सिसोदिया, हरीश सालवी,विनय दुबेला, घनश्याम सोनी, भोला दीवान, रवि सुरावत, नितिन सोनी, जितेंद्र व्यास,सत्येंद्र सिंह सोम,जितेंद्र बामनिया,श्याम सिंह चौहान, हेमंत बुलचंदानी,मनोहर पाटीदार,भागीरथ पाटीदार,संजय लाला जाट,नीलेश जैन,विनोद रुनवाल,मंगल पांडये,यश पांडये,लाला भाई, सचिन निमे,सहित जिले की समस्त तहसीलों, गौशालाओं एवं विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
उक्त जानकारी गौ सेवक ओम बड़ोदिया ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से प्रदान की।
