उज्जैन । कालिदास संस्कृत अकादमी, उज्जैन द्वारा आयोजित द्वितीय युवा संस्कृत सम्मेलन का रविवार को भव्य समापन समारोह संपन्न हुआ। सम्मेलन के द्वितीय दिवस का कार्यक्रम प्रातः 10:30 बजे मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुआ, जिसमें डॉ. महेंद्र पाण्डेय एवं डॉ. मीनाक्षी सिंह ने दीप प्रज्वलित किया।
सत्र का शुभारंभ करते हुए अकादमी के निदेशक डॉ. गोविंद गंधे ने कहा कि संस्कृत हमारी व्यावहारिक भाषा है। संस्कृत को सरल समाधान के रूप में अपनाकर हम देश भर से पधारे संस्कृतज्ञों को अपना जीवन समर्पित कर सकते हैं। उन्होंने संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न विद्वानों का सम्मान किया।
प्रथम सत्र में विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। श्री कैलाश किशोर, श्री हरिप्रित मिश्र, श्री राधेश्याम मनु भाई, डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय, डॉ. शशिकांत तिवारी, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. सपना चंदेल, डॉ. रविशंकर द्विवेदी, डॉ. सपना कुमार निशाद, डॉ. शशिकांत तिवारी आदि ने संस्कृत साहित्य, काव्यपाठ एवं अपनी रचनाओं का पाठ किया।
डॉ. विपिन कुमार द्विवेदी ने कहा कि काव्य ऐसी होनी चाहिए जिससे सुनने में भी अच्छा लगे, शब्दों का चयन सटीक हो। उन्होंने मधुर मधुशाला कविता का पाठ किया। डॉ. शिवकांत तिवारी (पटना) ने महर्षि वाल्मीकि एवं तुलसीदास जी का स्मरण करते हुए संस्कृत काव्य की महत्ता पर प्रकाश डाला।
डॉ. प्रीति पुजारा (अहमदाबाद) ने लघु नीतिका प्रस्तुत की।
द्वितीय सत्र संस्कृत पत्रकारिता विषय पर केंद्रित रहा। डॉ. ऋषिराज पाठक (नई दिल्ली) ने संस्कृत पत्रकारिता की वर्तमान समस्याओं एवं भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. अशोक कुमार विश्वोई, डॉ. रविशंकर द्विवेदी, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय (चित्रकूट) ने भी अपने विचार रखे।
उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जगदीश शर्मा ने संस्कृत भाषा के उपयोग को हिंदी के साथ जोड़ते हुए कहा कि संस्कृत का व्यावहारिक उपयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत पत्रकारिता से बाहर निकलने की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन अवसर पर कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. गोविंद गंधे ने देश भर से पधारे सभी संस्कृतज्ञों का आभार व्यक्त किया और संस्कृत के उत्थान के लिए उज्जैन में बार-बार आने का आमंत्रण दिया।
सत्र का संचालन डॉ. मीनाक्षी सिंह (इंदौरी) ने कुशलतापूर्वक किया।