मंदसौर/मल्हारगढ़/गोपाल मालेचा/ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विधानसभा मुख्यालय मल्हारगढ़ की कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं का ऐसा नज़ारा सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब जिम्मेदारों के क्षेत्र की यह स्थिति है, तो अन्य क्षेत्रों की हालत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। मंडी में इन दिनों सैकड़ों किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। सबसे गंभीर समस्या पीने के पानी की है। मंडी परिसर में लगे तीन नलों में से दो नल टूटे पड़े हैं और जो एक नल चालू है, उसके आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे किसान मजबूरी में दूषित पानी पीने को विवश हैं।


सूत्रों के अनुसार, हाल ही में मल्हारगढ़ एसडीएम के निरीक्षण के दौरान कुछ समय के लिए हजारों किसानों के लिए एक नल चालू किया गया, लेकिन उनके जाते ही व्यवस्था फिर जस की तस हो गई। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि प्रशासन केवल औपचारिकता निभा रहा है, जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं हो रहा।
मंडी परिसर में बनी पानी की प्याऊ वर्षों से उपेक्षित पड़ी है। न तो उसकी सफाई होती है और न ही उसमें पानी की व्यवस्था है। वहीं, सुलभ कॉम्प्लेक्स पर हमेशा ताला लगा रहता है, जिससे किसान, व्यापारी, हम्माल और तुलावटी खुले में जाने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनी हुई है। जहां एकमात्र नल चालू है, वहां कचरे का ढेर और गाजर घास उगी हुई है। इस कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। मंडी में मौजूद लोगों का कहना है कि प्रशासन की इस लापरवाही से कभी भी बड़ी स्वास्थ्य समस्या खड़ी हो सकती है।


मामला सोशल मीडिया पर आने के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया, लेकिन केवल औपचारिकता निभाकर लौट गया। स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाटर कूलर ओर बिसलेरी का पानी पीने वाले जिम्मेदार अधिकारी अपने एयर कंडीशनर कमरों से बाहर निकलकर किसानों की पीड़ा समझेंगे, या फिर एक बार फिर खानापूर्ति कर इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर दिया जाएगा?