मंदसौर। पुलिस केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण का माध्यम भी है। इसका जीवंत उदाहरण आज मंदसौर में देखने को मिला, जब पुलिस अधीक्षक की तत्परता से एक महिला के चेहरे पर 'सच्ची खुशी' लौट आई।
क्या था पूरा मामला?
ग्राम आपूखेड़ी (तहसील मल्हारगढ़) की निवासी श्रीमती कैलाशी बाई पति श्री दुले सिंह पिछले 8 महीनों से मानसिक तनाव में थीं। उनके गहने उनके बेटे के साले ने मंदसौर के एक सुनार के पास गिरवी रख दिए थे। पारिवारिक विवाद और साले की बदमाशी के कारण महिला को उसके जेवर वापस नहीं मिल पा रहे थे। सुनार का तर्क भी कानूनन सही था कि वह जेवर केवल उसी व्यक्ति को सौंप सकता है जिसने उन्हें गिरवी रखा था।
एसपी की जनसुनवाई में मिली राहत
निराश होकर आवेदिका कैलाशी बाई आज पुलिस अधीक्षक मंदसौर श्री विनोद मीना के समक्ष उपस्थित हुईं और अपनी व्यथा सुनाई। मामले की गंभीरता और महिला की परेशानी को समझते हुए एसपी श्री मीना ने तत्काल संवेदनशीलता दिखाई और थाना कोतवाली पुलिस को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
एसपी के निर्देश मिलते ही कोतवाली पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस टीम ने संबंधित सुनार के पास पहुँचकर मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट की। इसके बाद:
- जांच संबंधी आवश्यक कार्रवाई की गई।
- संबंधित पक्षों के कथन दर्ज किए गए।
- शपथ पत्र संबंधी कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण कराई गईं।
चेहरे पर लौटी 'सच्ची खुशी'
पुलिस की इस त्वरित और न्यायपूर्ण कार्रवाई के परिणामस्वरूप महिला को उसके समस्त गहने और आभूषण सुरक्षित सुपुर्द कर दिए गए। महीनों की परेशानी के बाद जब जेवर महिला के हाथ में आए, तो उनके चेहरे पर जो संतोष और 'सच्ची खुशी' दिखाई दी, उसने पुलिस के सेवा परमो धर्म: के ध्येय को सार्थक कर दिया।
"पुलिस का उद्देश्य पीड़ित की सहायता करना है। कानूनी प्रक्रियाओं के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर जब हम किसी की समस्या सुलझाते हैं, तो वह समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को और मजबूत करता है।"
— पुलिस प्रशासन, मंदसौर
